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22.7.10

वाघा बॉर्डर पर जूतों की ठायं-ठायं बंद

वाघा सीमा पर भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा जोर-जोर से पैर पटककर की जाने वाली परेड को आसान बनाया जा रहा है। परेड में हिस्सा लेने वाले सैनिकों के घुटनों में हुई तकलीफ के कारण यह कदम उठाया गया है।
इस परेड को देखने के लिए सीमा के दोनों तरफ दूर-दूर से लोग आते हैं। बरसों से चली आ रही दुश्मनी के बावजूद परेड के समय सीमा के दोनों तरफ अच्छा माहौल होता है। भारतीय अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक अब दोनों पक्षों ने इस परेड को आसान बनाने के लिए एक समझौता किया है।
भारतीय सीमा सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी हिम्मत सिंह कहते हैं, "हमने रोजाना होने वाली इस परेड की आक्रामता को कम करने का प्रस्ताव रखा था और इसके बाद एक तरफा तौर पर इसे लागू करने का फैसला भी ले लिया। अब पाकिस्तानी रेंजर्स भी इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं और उन्होंने भी अपनी परेड की आक्रामकता को कम किया है।"
सिंह बताते हैं कि जोर-जोर से पैर पटक कर चलना इस परेड का अहम हिस्सा होता था, लेकिन इसकी वजह से यह परेड करने वाले सैनिकों के घुटनों को बहुत नुकसान होता था। इसी वजह से दोनों पक्ष परेड को आसान बनाने पर सहमत हुए हैं।

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