गरीबों का राशन डकार रहे है अमीर
सफीदों, (हरियाणा) : सफीदों में अमीरों की बल्लेबल्ले है तथा गरीब थल्लेथल्ले है, क्योंकि सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई बी.पी.एल. राशन योजना से क्षेत्र के सैंकड़ों गरीब महरूम हैं। गरीबों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही बी.पी.एल. कार्ड योजना का लाभ असली हकदारों को नहीं मिल पा रहा है। गरीब अपने हक को प्राप्त करने के लिए दरदर ठोकर खाने को मजबूर है। दरदर ठोकर खाने के बावजूद भी गरीब को उसका हक प्राप्त नहीं हो पा रहा है। देश व प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने अपने आप को गरीबों का मसीहा साबित करने के लिए बी.पी.एल. योजना तो लागू तो कर दी लेकिन सरकार ने इस बात पर कभी भी ध्यान नहीं दिया कि इस योजना का फायदा वास्तविक गरीब को मिला है या नहीं। सरकार ने इस योजना की सारी लगाम अधिकारियों के हाथ में पकड़ा दी। लगाम हाथ में आने के बाद अधिकारियों ने जो जी में आया वहीं किया। सर्वे में वास्तविक गरीब के नाम तो काट दिए गए तथा अमीर के नाम सर्वे में शामिल कर लिए गए। नतीजा यह हुआ कि गरीब के हाथ में तो हरें रंग का कार्ड थमा दिया गया, जिसमें राशन डिपों से कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है तथा गुलाबी व पीले कार्ड अमीरों के हाथों में दे दिए गए, जिससे गरीब का हक मारने वाला वह अमीर हर महीने अपने घर में सस्ते भावों में राशन डिपों से राशन ला रहा है। सब कुछ इस तरह से चल रहा है मानों प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी आँखों पर काली पट्टी बंधी हो। सफीदों में सैंकड़ों इस तरह के उदाहरण भरे पड़े हैं। ऐसा ही एक उदाहरण कस्बे के रेलवे स्टेशन के पास एक टूटीफूटी झौपड़ी में रहने वाले मां बेटें का भी हैं। यह परिवार भी अधिकारियों की भाई भतीजावाद की भेंट चढ़ गया तथा इनके हाथ में भी गुलाबी राशन कार्ड को काटकर हरा राशन कार्ड थमा दिया गया है। आज इस परिवार की सूध लेने वाला ना तो प्रशासन है तथा ना ही कोई राजनेता है। कस्बे के रेलवे स्टेशन की दीवार के ठीक नीचे एक टूटी फूटी छोटी सी झोपड़ी डालकर अपने बेटे रोशन लाल के साथ उसकी बुढ़ी मां मूर्ति देवी रहती हैं।मूर्ति देवी की झोपड़ी भी पूरी तरह से जर्जर हालात में है। मूर्ति देवी के पति रामकिशन की काफी पहले मौत हो चुकी है। उसका एक ही सहारा उसका बेटा रोशन लाल है जो मानसिक तौर पर बीमार है। घर में आय का कोई साधन नहीं है। बेटा रोशनलाल ही थोड़ी बहुत मजदूरी करके अपना व अपनी मां का पेट पाल रहा है। बेटा मजदूरी करके कुछ कमा लाए तो घर का चूल्हा जल जाता है वरना दोनों भूखे पेट ही सो जाते हैं, क्योंकि सर्वे करने वाले अधिकारियों ने जो उसका गुलाबी राशन कार्ड काट दिया है। सर्वे करने वाले अधिकारियों का यह बात समझ में नहीं आती कि इन मां बेटे की मामूली सी झौपड़ी में उन्हें कितनी बड़ी कोठी नजर आई। सरकार द्वारा गरीबों को राशन बांटने वाली बी.पी.एल. योजना भ्रष्ट अधिकारियों की अनदेखी के चलते 2 वर्ष् पूर्व इस परिवार को मिलनी बंद हो गई थी, जोकि बार बार अधिकारियों कों गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिल पाई। इस परिवार का ना तो खुद का कोई मकान है तथा ना ही कोई कमाई का साधन। लेकिन अधिकारियों की आंखों को इनकी गरीबी नजर नही आई और इनके बी.पी.एल. कार्ड रद्द करके इनके हाथ में हरें रंग का कार्ड थमा दिए गया । गरीब मूर्ति देवी व उसका बेटा रोशन लाल बडे़ ही मुश्किल हालातों में जी रहा है। खुले आसमान के नीचे तो वे सोते ही हैं।बरसात के मौसम तो उनके लिए भी मुश्किलें लेकर आता है। उनकी झौपड़ी के पास ही ट्रक यूनियन का दतर है। प्रशासन की बेरूखी के बाद ट्रक यूनियन के ड्राईवरों को ही उन पर तरस आ गया। दिन में तो ट्रक यूनियन का दफ्त्तर चलता है तथा ट्रक ड्राईवरों ने रात में इन दोनों मां बेटे को दतर में सोने की इजाजत दे दी है। अब ये दोनों मां बेटा दिन में तो मजदूरी की तलाश में इधर उधर फिरते हैं तथा रात में इस ट्रक यूनियन के दतर में आकर सो जाते हैं। गरीब मूर्ति देवी ने बताया कि उसने गुलाबी राशन कार्ड बनवाने के लिए जनप्रतिनिधियों से लेकर छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों तक खूब धक्के खाए लेकिन उसे कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई। नतीजतन आज तक भी उसका गुलाबी कार्ड दोबारा से नहीं बन पाया है। उसका कहना है कि वह अपनी जिंदगी तो किसी तरह से काट लेगी लेकिन उसे फिक्र तो अपने बेटे की लगी हुई है कि उसका गुजरबसर किस तरह से होगा, क्योंकि उसके पास रहने के लिए ना तो मकान है तथा ना खाने के लिए भोजन है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसका गुलाबी राशन कार्ड बनवाया जाए तथा सरकार की तरफ से उसे मकान बनवाकर दिया जाए ताकि वे अपना सही रूप से गुजर बसर कर सकें।
सफीदों, (हरियाणा) : सफीदों में अमीरों की बल्लेबल्ले है तथा गरीब थल्लेथल्ले है, क्योंकि सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई बी.पी.एल. राशन योजना से क्षेत्र के सैंकड़ों गरीब महरूम हैं। गरीबों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही बी.पी.एल. कार्ड योजना का लाभ असली हकदारों को नहीं मिल पा रहा है। गरीब अपने हक को प्राप्त करने के लिए दरदर ठोकर खाने को मजबूर है। दरदर ठोकर खाने के बावजूद भी गरीब को उसका हक प्राप्त नहीं हो पा रहा है। देश व प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने अपने आप को गरीबों का मसीहा साबित करने के लिए बी.पी.एल. योजना तो लागू तो कर दी लेकिन सरकार ने इस बात पर कभी भी ध्यान नहीं दिया कि इस योजना का फायदा वास्तविक गरीब को मिला है या नहीं। सरकार ने इस योजना की सारी लगाम अधिकारियों के हाथ में पकड़ा दी। लगाम हाथ में आने के बाद अधिकारियों ने जो जी में आया वहीं किया। सर्वे में वास्तविक गरीब के नाम तो काट दिए गए तथा अमीर के नाम सर्वे में शामिल कर लिए गए। नतीजा यह हुआ कि गरीब के हाथ में तो हरें रंग का कार्ड थमा दिया गया, जिसमें राशन डिपों से कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है तथा गुलाबी व पीले कार्ड अमीरों के हाथों में दे दिए गए, जिससे गरीब का हक मारने वाला वह अमीर हर महीने अपने घर में सस्ते भावों में राशन डिपों से राशन ला रहा है। सब कुछ इस तरह से चल रहा है मानों प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी आँखों पर काली पट्टी बंधी हो। सफीदों में सैंकड़ों इस तरह के उदाहरण भरे पड़े हैं। ऐसा ही एक उदाहरण कस्बे के रेलवे स्टेशन के पास एक टूटीफूटी झौपड़ी में रहने वाले मां बेटें का भी हैं। यह परिवार भी अधिकारियों की भाई भतीजावाद की भेंट चढ़ गया तथा इनके हाथ में भी गुलाबी राशन कार्ड को काटकर हरा राशन कार्ड थमा दिया गया है। आज इस परिवार की सूध लेने वाला ना तो प्रशासन है तथा ना ही कोई राजनेता है। कस्बे के रेलवे स्टेशन की दीवार के ठीक नीचे एक टूटी फूटी छोटी सी झोपड़ी डालकर अपने बेटे रोशन लाल के साथ उसकी बुढ़ी मां मूर्ति देवी रहती हैं।मूर्ति देवी की झोपड़ी भी पूरी तरह से जर्जर हालात में है। मूर्ति देवी के पति रामकिशन की काफी पहले मौत हो चुकी है। उसका एक ही सहारा उसका बेटा रोशन लाल है जो मानसिक तौर पर बीमार है। घर में आय का कोई साधन नहीं है। बेटा रोशनलाल ही थोड़ी बहुत मजदूरी करके अपना व अपनी मां का पेट पाल रहा है। बेटा मजदूरी करके कुछ कमा लाए तो घर का चूल्हा जल जाता है वरना दोनों भूखे पेट ही सो जाते हैं, क्योंकि सर्वे करने वाले अधिकारियों ने जो उसका गुलाबी राशन कार्ड काट दिया है। सर्वे करने वाले अधिकारियों का यह बात समझ में नहीं आती कि इन मां बेटे की मामूली सी झौपड़ी में उन्हें कितनी बड़ी कोठी नजर आई। सरकार द्वारा गरीबों को राशन बांटने वाली बी.पी.एल. योजना भ्रष्ट अधिकारियों की अनदेखी के चलते 2 वर्ष् पूर्व इस परिवार को मिलनी बंद हो गई थी, जोकि बार बार अधिकारियों कों गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिल पाई। इस परिवार का ना तो खुद का कोई मकान है तथा ना ही कोई कमाई का साधन। लेकिन अधिकारियों की आंखों को इनकी गरीबी नजर नही आई और इनके बी.पी.एल. कार्ड रद्द करके इनके हाथ में हरें रंग का कार्ड थमा दिए गया । गरीब मूर्ति देवी व उसका बेटा रोशन लाल बडे़ ही मुश्किल हालातों में जी रहा है। खुले आसमान के नीचे तो वे सोते ही हैं।बरसात के मौसम तो उनके लिए भी मुश्किलें लेकर आता है। उनकी झौपड़ी के पास ही ट्रक यूनियन का दतर है। प्रशासन की बेरूखी के बाद ट्रक यूनियन के ड्राईवरों को ही उन पर तरस आ गया। दिन में तो ट्रक यूनियन का दफ्त्तर चलता है तथा ट्रक ड्राईवरों ने रात में इन दोनों मां बेटे को दतर में सोने की इजाजत दे दी है। अब ये दोनों मां बेटा दिन में तो मजदूरी की तलाश में इधर उधर फिरते हैं तथा रात में इस ट्रक यूनियन के दतर में आकर सो जाते हैं। गरीब मूर्ति देवी ने बताया कि उसने गुलाबी राशन कार्ड बनवाने के लिए जनप्रतिनिधियों से लेकर छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों तक खूब धक्के खाए लेकिन उसे कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई। नतीजतन आज तक भी उसका गुलाबी कार्ड दोबारा से नहीं बन पाया है। उसका कहना है कि वह अपनी जिंदगी तो किसी तरह से काट लेगी लेकिन उसे फिक्र तो अपने बेटे की लगी हुई है कि उसका गुजरबसर किस तरह से होगा, क्योंकि उसके पास रहने के लिए ना तो मकान है तथा ना खाने के लिए भोजन है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसका गुलाबी राशन कार्ड बनवाया जाए तथा सरकार की तरफ से उसे मकान बनवाकर दिया जाए ताकि वे अपना सही रूप से गुजर बसर कर सकें।


Mahavir Mittal

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